मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

“पंचायतन”

हमारे शास्त्रों में “पंचायतन” पूजा को बहुत महत्व दिया गया है। “पंचायतन” का अर्थ होता है- पंच देवों की पूजा ये पांच देव है- सूर्य,गणेश,विष्णु,शिव व शक्ति (दुर्गा)। “पंचायतन” के भी पांच प्रकार होते हैं जैसे शिव पंचायतन, विष्णु पंचायतन जिसमें इन पंच देवों एक विशेष प्रकार से स्थापित किया जाता है। इन पंच देवों का पूजन किस प्रकार किया जाता है इसके तो कई विधान है जैसे पंचोपचार-षोडषोपचार आदि किंतु इन्हें सबसे प्रिय क्या है;यह मैं आपके लिए यहां स्पष्ट कर रहा हूं, जैसे गणेश जी को तर्पण सर्वाधिक प्रिय है, भगवान सूर्य को अर्घ्य, शिव को अभिषेक, शक्ति को अर्चन एवं विष्णु को स्तुति सबसे अधिक प्रिय है।


वैदिक अनुष्ठान करवाएं

“ज्योतिर्विद” पं. हेमन्त रिछारिया

वैदिक अनुष्ठान करवाने के लिए संपर्क करें-


मित्रों, यदि आप अपनी वर्षगांठ, पुत्र-पुत्री के जन्मोत्सव, विवाह वर्षगांठ, पुण्यस्मरण, आदि के अवसर पर वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न करवाना चाहते हैं या ज्योतिष शिविर एवं आध्यात्मिक परिचर्चा आयोजित करवाना चाहते हैं तो “प्रारब्ध ज्योतिष संस्थान” के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हमारे यहां उच्च प्रशिक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों द्वारा निम्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न करवाए जाते हैं।

अनुष्ठान का नाम-
-------------------
 

१. राजराजेश्वरी मां ललिताम्बिका सहस्त्रार्चन अनुष्ठान
२. संगीतमय रुद्राभिषेक एवं महाआरती
३. संगीतमय सहस्त्रधारा रुद्राभिषेक
४. संगीतमय द्वादश ज्योर्तिलिंग रुद्राभिषेक
५. सवालक्ष पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक
६. मां बगलामुखी अनुष्ठान
७. महाआरती
८. दीपार्चन
९. गौ पूजा
१०.महामृत्युंजय अनुष्ठान
११. नवग्रह शांति

हमारा पता है- प्रारब्ध ज्योतिष संस्थान
“ज्योतिर्विद” हेमन्त रिछारिया, 
 हमारा ई-मेल पता है-astropoint_hbd@yahoo.com

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

“खाली दिमाग; भगवान का घर”-

एक पुरानी कहावत है -“खाली दिमाग शैतान का घर”। यह बात ही गलत है। मेरे देखे “खाली दिमाग तो भगवान का घर” होता है, बशर्ते वह पूर्णरूपेण खाली हो और खाली होने की तरकीब है “ध्यान”। अक्सर लोगों के ध्यान के बारे अनेक प्रश्न होते हैं कि ध्यान क्या है; कैसे किया जाता है आदि-आदि। इन सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर है-खाली होना। दिल से; दिमाग; विचार से सब ओर से पूर्णरूपेण हो जाना; रिक्तता। जब आप अपने इस पंचमहाभूतों से निर्मित नश्वर शरीर रूपी पात्र को खाली कर लेते हैं तब इस पात्र में परमात्मा रूपी अमृत के भरे होने की अनुभूति होती है। इस अनुभूति विद्वतजन विलग-विलग नामों से पुकरते हैं कोई ईश्वरानुभूति कहता है, कोई ब्रह्मसाक्षात्कार, कोई तत्व-दर्शन, कोई मोक्ष, कोई निर्वाण, कोई कैवल्य ये सब नामों के भेद हैं आप चाहें तो कोई नया नाम भी दे सकते हैं किंतु जो अनुभूत होता है वह निश्चय ही शब्दातीत है; अवर्णनीय है। ऐसी दिव्य अनुभूति इस जगत में सभी को हो ऐसी उस अंतर में विराजमान प्रभु से प्रार्थना है।